Saturday, 24 November 2012

"जेष्ठाच्या प्रयत्नाने २६/११ च्या साक्षीदाराला मिळाला शाळेत प्रवेश." (ही बातमी खाली डीबी स्टार मध्ये वरून दुसर्या स्थानावर वाचावी .)

"जेष्ठाच्या प्रयत्नाने २६/११ च्या साक्षीदाराला मिळाला शाळेत प्रवेश."   
(ही बातमी खाली डीबी स्टार मध्ये वरून दुसर्या स्थानावर वाचावी .)

Tuesday, 20 November 2012

जब आम आदमी के विचारों की होती है उपेक्षा और रहती है केवल नेताओ की भाषा .........

 दिनांक :-- २0  नोव्हेंबर  २०१२.

     
जब आम आदमी के विचारों की होती है उपेक्षा


और रहती है केवल नेताओ की भाषा ।



तब डूबती इज्जत,  दूर होती सत्ता, 

हो जाते मतभेद  और  पार्टी की होती अवदशा.

      


गडकरी ब्रांड कश्तीमें हुआ एक छेद,  फिर भी नौका पार लगाना  है,

२७२+ की चुनौती को अब केवल,मोदी ब्रांडिंग से ही पूरा करना है |

काश श्री नितिन गडकरीजी ०६ नवम्बर २०१२ को मेरे जैसे सामान्य व्यक्ति द्वारा 

फेसबुक और ट्विटर पर लिखे निम्नांकित विचारों पर अमल करते तो वे 


स्वयं  भा.ज.पा.  के  साथ  देशभर  में  नैतिकता  से  ओतप्रोत  कहलाते, 


अत्याधिक सम्मान पाते और श्री यशवंत सिन्हा सहित अन्य भा.ज.पा. 

नेताओं के लिए विरोधात्मक बोलनें का अवसर उत्पन्न नहीं होने देते। 


काश मेरी बात मान ली जाती,  तो भाजपा की अंतर्कलह और वरिष्ठतम 

कार्यकर्ताओं की आपसी फूट ना कभी उजागर होती और नाही साख की 

हानि होती। दुर्भाग्य से आज भाजपा के सभी स्तरों के नेता कौंग्रेस के पद 

चिन्हों पर चलते हुवे आम इंसान के विचारों को महत्त्व देना भूल चुके है जो 

विनाश काले विपरीत बुद्धि का परिचायक है यह कहनें की आवश्यकता नहीं है।

          
 मेरे द्वारा देश में नैतिकता और आदर्श की स्थापना के साथ -साथ 

भाजपा की सुरक्षा हेतु, ०६ नवम्बर २०१२ को उद्घृत विचार निम्नानुसार थे:--

06 / 11 / 2012. 

क्या श्री नितिन गडकरीजी आदर्श व समर्पण का परिचय देंगे ?


                       ह सभी जानते है कि श्री नितिन गडकरी केवल भरत भूमि के परम वैभव के लिए जीनें 

वाले, पूरी तरह से अनुशासित व ईमानदार लोगों के सानिध्य में छोटे के बड़े हुवे है । अर्थात राष्ट्रभक्त 

संस्था आर.एस.एस. के वे अनुशासित और संस्कारित स्वयंसेवक रहे है ।

  इसलिए भारत के कल्याण, देश में आदर्श व्यवस्था की स्थापना के अवसर, भाजपा की सुदृढ़ता 

और स्व-नैतिकता के मद्दे नजर स्वयं गडकरीजी को बड़े उदारवादी मन के साथ आगे आना चाहिए,  

यह उनसे अपेक्षित है | "  इस समय उन्होंने उनके विरुद्ध चल रही शासकीय जांच की रिपोर्ट आनें 

तक दल के अध्यक्ष पद पर रहनें के बावजूद अपना कार्यभार उपाध्यक्ष को या अन्य किसी को जिन्हें 

पार्टी अधिकृत करे, सम्भलवाकर अवकाश पर चले जाना चाहिए | इसके अतिरिक्त श्री गडकरी 

जीनें उपरोक्त उल्लेखित अवकाश अवधि में पार्टी के समस्त निर्णयों के लिए स्वयं को मुक्त कर लेना 

चाहिए| शायद यही समर्पण उनके द्वारा देश के नागरिकों और भारतीय जनता पार्टी को दिया जानें 

वाला जीवन का सर्वश्रेष्ट उपहार तथा त्याग व चुनौती का परिक्षण होगा|                                                                                                       


ऐसे कठोर समय भाजपा दल के कार्यकर्ताओं और संघ में उनके प्रतिनिष्ठा और विश्वास होनें के 

बावजूद क्या श्री नितिन गडकरी जी उपरोक्त समर्पित कृति को चरितार्थ करनें का साहस दिखाएँगे 

और देश के हर नागरिक के मन में स्वयं अपनी स्वच्छ छबि स्थापित करेंगे ?