Friday, 30 March 2012
Thursday, 29 March 2012
भ्रष्टाचार - घोटालों के कारण
३०/०३/२०१२. भ्रष्टाचार - घोटालों के कारण
भ्रष्टाचार और घोटाले होने के कारणों में मुख्यत: व्यक्ति
का लोभ, सख्त कानून व्यवस्था का अभाव जिससे गुन्हा करनें वाले
को भय से मुक्ति तथा किसी अधिकार संपन्न व्यक्ति के द्वारा किसी भी कारण अपराधी को संरक्षण की स्थिति प्रमुख है। ऐसे समय कठोर और अत्यंत कड़वे निर्णय लेनें बजाय इन विषयों पर अपना मुंह मोड़ लेने पर कोई भी व्यक्ति हो उसके अधीनस्थ लोगों में जैसे मंत्रियों, अधिकारियों या कर्मचारियों में ना तो कोई अनुशासन रहपाएगा और नाही उसका कोई भय रहेगा। इतना ही नहीं ऐसे व्यक्ति के प्रति आत्मिक आदर की भावना भी शनै-शनै समाप्त हो जावेगी।
" इस स्थिति में जनता को प्रामाणिक और दक्ष प्रशासन मिलने की सोचना ठीक वैसा ही होगा जैसे किसी अति महत्व पूर्ण वस्तु की खोज बिना रोशनी के अँधेरे कोठरी में करना।"
क्या देश में आए दिन खुल रहे नए-नए करोड़ों रुपयों के घोटालों के पीछे समय पर कठोर और कड़वे निर्णय न लिए जाना यह भी एक कारण तो नहीं है ? क्या इस विषय में निष्पक्ष अध्ययन और उसके परिणामों के अनुसार अग्रिम कार्यवाही करना निश्चित ही देश हित में नही होगी ? क्या राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, देशके सभी मुख्यमंत्री और विभिन्न संस्थाओं के प्रमुखों द्वारा देश हित में उक्त अध्ययन करवानें की व्यवस्था और इमानदार चरित्र की प्रस्तुति होगी ? इस प्रक्रिया में सफल होनें पर निश्चित ही जनता में मलिन होती जा रही छबि निखर जायेगी और भ्रष्टाचारी को संरक्षण देनें के आरोप मिट जायेंगे, जिसकी मै सभी के लिए ह्रदय से कामना करता हूँ।
.....चन्द्रकांत वाजपेयी [जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता] औ.बाद.
ई-मेल:- chandrakantvjp@gmail.com
Saturday, 17 March 2012
IT PROVES " WHY TO APPLY " RIGHT TO RE-CALL " & ": भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत: Did I say something wron...
IT PROVES " WHY TO APPLY " RIGHT TO RE-CALL " & ": भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत: Did I say something wron...: भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत: Did I say something wrong? Full Vedio of Arvind Speech
Friday, 16 March 2012
Wednesday, 14 March 2012
" देशभर की विभिन्न सरकारें और बजट "
१४ / ०३ / २०१२.
" देशभर की विभिन्न सरकारें और बजट "
प्रिय सरकार के सभी मंत्री और अधिकारियों के साथ-साथ प्रदेश के
जानना महत्वपूर्ण है कि :--
" यदि देश, प्रदेश या अपनें घर का विकास करना है तो उस क्षेत्र से
सम्बंधित हर व्यक्ति को ज्ञान, संसाधन और मानवशक्ति में वृद्धी करना
आवश्यक है। कोई भी सरकार हो या घर का मुखिया उसे टैक्स लगाकर
" देशभर की विभिन्न सरकारें और बजट "
प्रिय सरकार के सभी मंत्री और अधिकारियों के साथ-साथ प्रदेश के
समस्त सम्मानीय नागरिकगण, यह अत्यंत कटु होनें के बावजूद
जानना महत्वपूर्ण है कि :--
" यदि देश, प्रदेश या अपनें घर का विकास करना है तो उस क्षेत्र से
सम्बंधित हर व्यक्ति को ज्ञान, संसाधन और मानवशक्ति में वृद्धी करना
आवश्यक है। कोई भी सरकार हो या घर का मुखिया उसे टैक्स लगाकर
अथवा रहवासियों से धन संग्रहित करके उक्त विकास कार्य करनें होते है
। यह एक न्यायिक और योग्य व्यवस्था है, जिस पर किसी की आपत्ति
नहीं होना चाहिए। परन्तु पैसा कितना, किस समुदाय से और किस मद
में लिया जाए इस पर विचार और व्यवहार अधिक महत्वपूर्ण है।"
मेरे विचार से किसी भी सरकार नें दैनिक भोजन-सामग्री,
सस्ते वस्त्र,औषधि, केवल एक सामान्य आवास और घरेलु इंधन पर
टैक्स नहीं लगाना चाहिए। अथवा बहुत आवश्यक हुआ तो केवल १ या २
प्रतिशत तक इस पर टैक्स वसुल करना चाहिए। इसी प्रकार किसी भी
टैक्स में एक मुश्त १०% से अधिक वृद्धि करना अथवा किसी भी वस्तु
या सेवा पर कुल १५% से अधिक टैक्स वसूलना अच्छी सरकार का
लक्षण नहीं होगा।
यह संतोष का विषय है की कुछ सरकारों नें अच्छी सरकार का
परिचय देनें का प्रयास करते हुवे उपरोक्त जीवनावश्यक चीजों पर टैक्स
नहीं लगाया अथवा बढाया है । यदि पूर्व से कोई टैक्स २०% या अधिक
है तो कोई आपत्ति नहीं होगी परन्तु कोई नया टैक्स लगाकर २०%टैक्स
करना नागरिकों का आर्थिक शोषण होगा।
यह विनंती है की दो किश्तों में अधिकतम १५% तक ही टैक्स
वसूला जाए जिससे नागरिकों का सहकार्य मिलेगा अन्यथा सरकार को
नाकाम कहा जावेगा।
"क्या सरकार नाकाम कहलाना पसंद करेगी ? नागरिकों को नाराज
करेगी ? या इस निवेदन पर सकारात्मक निर्णय लेकर आदर्श प्रस्तुत
करेगी ?
। यह एक न्यायिक और योग्य व्यवस्था है, जिस पर किसी की आपत्ति
नहीं होना चाहिए। परन्तु पैसा कितना, किस समुदाय से और किस मद
में लिया जाए इस पर विचार और व्यवहार अधिक महत्वपूर्ण है।"
मेरे विचार से किसी भी सरकार नें दैनिक भोजन-सामग्री,
सस्ते वस्त्र,औषधि, केवल एक सामान्य आवास और घरेलु इंधन पर
टैक्स नहीं लगाना चाहिए। अथवा बहुत आवश्यक हुआ तो केवल १ या २
प्रतिशत तक इस पर टैक्स वसुल करना चाहिए। इसी प्रकार किसी भी
टैक्स में एक मुश्त १०% से अधिक वृद्धि करना अथवा किसी भी वस्तु
या सेवा पर कुल १५% से अधिक टैक्स वसूलना अच्छी सरकार का
लक्षण नहीं होगा।
यह संतोष का विषय है की कुछ सरकारों नें अच्छी सरकार का
परिचय देनें का प्रयास करते हुवे उपरोक्त जीवनावश्यक चीजों पर टैक्स
नहीं लगाया अथवा बढाया है । यदि पूर्व से कोई टैक्स २०% या अधिक
है तो कोई आपत्ति नहीं होगी परन्तु कोई नया टैक्स लगाकर २०%टैक्स
करना नागरिकों का आर्थिक शोषण होगा।
यह विनंती है की दो किश्तों में अधिकतम १५% तक ही टैक्स
वसूला जाए जिससे नागरिकों का सहकार्य मिलेगा अन्यथा सरकार को
नाकाम कहा जावेगा।
"क्या सरकार नाकाम कहलाना पसंद करेगी ? नागरिकों को नाराज
करेगी ? या इस निवेदन पर सकारात्मक निर्णय लेकर आदर्श प्रस्तुत
करेगी ?
"
Monday, 5 March 2012
' सरकारी पैसे पर जनता का नियंत्रण ' Chandrakant Vajpeyi " जनधन क्षेत्र-समृद्धि योजना." महाराष्ट्रात पायलट प्रोजेक्ट क्रियान्वयन.
" सरकारी पैसे पर जनता का नियंत्रण " ------- कीर्ति शर्मा पाठक.
आईये आज बात करते हैं हमारे अपने टैक्स मनी की |
हम सरकार को टैक्स देते हैं और इस उम्मीद मैं बैठे रहते हैं कि अब समाजोपयोगी कार्यों में इस का उपयोग होगा |
१) दिल्ली में कॉमनवेल्थ खेल के नाम पर ७० हज़ार करोड़ रूपये फूंके गए |अच्छे खासे फुटपाथ व् सड़कों को तोड़ कर दोबारा बनाया गया |
२) दिल्ली नगर निगम के पास सफाई कर्मियों व् ठेकेदारों को देने को पैसे नहीं हैं पर नगर निगम कि छत के ऊपर हेलीपैड बनाया जा रहा है ताकि नेताओं के हेलीकॉप्टर वहां उतर सकें |
३) बस्तियों के सौन्दर्यकरण पर पैसे खर्चे जाते हैं परन्तु स्कूल भवन न होने पर फंड डायवर्ट नहीं हो सकता,सीवर सिस्टम न होने पर फंड डायवर्ट नहीं हो सकता | चाहे बस्ती में लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था न हो परन्तु यदि सौन्दर्यकरण के अंतर्गत फव्वारे लगवाना कमेटी ने पास किया है तो फव्वारे ही लगेंगे चाहे पानी की कमी के चलते वे एक दिन भी न चलें |
जब हम अपनी समस्याएं ले कर जाते हैं तो अफसर फंड की कमी की दुहाई देते हैं |
ज़ाहिर है सरकार के पास पैसा तो है पर वह गलत कामों में उस का इस्तेमाल कर रही है, ऐसी चीज़ों पर इस्तेमाल किया जा रहा है जिस की हमें ज़रुरत ही नहीं |
हमें ज़रुरत है मोहल्ला सभाओं की,वार्ड सभाओं की,ताकि हम अपने जनप्रतिनिधियों और स्थानीय अफसरों के साथ मिल कर उस फंड का अपने ज़रुरत के मुताबिक इस्तेमाल करवा सकें |
हमें ज़रुरत है व्यवस्था परिवर्तन की जहाँ हम एक जागरूक नागरिक का फ़र्ज़ निभाते हुए सरकारी फंड का सही उपयोग करा सकें |
हमें ज़रुरत है अपने कर्तव्यों का पालन करने की जिस से हम अपने अधिकार पा सकें |
आइये हम सब जागरूक होने की दिशा में पहला कदम बढायें और स्थानीय चर्चा समूह के मेम्बर बनें -
अपनी बात आगे तक पहुंचाएं व् उन की बात सुनें व् जानें -
गाँधी जी के स्वराज की कल्पना को साकार करें |
हम सरकार को टैक्स देते हैं और इस उम्मीद मैं बैठे रहते हैं कि अब समाजोपयोगी कार्यों में इस का उपयोग होगा |
१) दिल्ली में कॉमनवेल्थ खेल के नाम पर ७० हज़ार करोड़ रूपये फूंके गए |अच्छे खासे फुटपाथ व् सड़कों को तोड़ कर दोबारा बनाया गया |
२) दिल्ली नगर निगम के पास सफाई कर्मियों व् ठेकेदारों को देने को पैसे नहीं हैं पर नगर निगम कि छत के ऊपर हेलीपैड बनाया जा रहा है ताकि नेताओं के हेलीकॉप्टर वहां उतर सकें |
३) बस्तियों के सौन्दर्यकरण पर पैसे खर्चे जाते हैं परन्तु स्कूल भवन न होने पर फंड डायवर्ट नहीं हो सकता,सीवर सिस्टम न होने पर फंड डायवर्ट नहीं हो सकता | चाहे बस्ती में लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था न हो परन्तु यदि सौन्दर्यकरण के अंतर्गत फव्वारे लगवाना कमेटी ने पास किया है तो फव्वारे ही लगेंगे चाहे पानी की कमी के चलते वे एक दिन भी न चलें |
जब हम अपनी समस्याएं ले कर जाते हैं तो अफसर फंड की कमी की दुहाई देते हैं |
ज़ाहिर है सरकार के पास पैसा तो है पर वह गलत कामों में उस का इस्तेमाल कर रही है, ऐसी चीज़ों पर इस्तेमाल किया जा रहा है जिस की हमें ज़रुरत ही नहीं |
हमें ज़रुरत है मोहल्ला सभाओं की,वार्ड सभाओं की,ताकि हम अपने जनप्रतिनिधियों और स्थानीय अफसरों के साथ मिल कर उस फंड का अपने ज़रुरत के मुताबिक इस्तेमाल करवा सकें |
हमें ज़रुरत है व्यवस्था परिवर्तन की जहाँ हम एक जागरूक नागरिक का फ़र्ज़ निभाते हुए सरकारी फंड का सही उपयोग करा सकें |
हमें ज़रुरत है अपने कर्तव्यों का पालन करने की जिस से हम अपने अधिकार पा सकें |
आइये हम सब जागरूक होने की दिशा में पहला कदम बढायें और स्थानीय चर्चा समूह के मेम्बर बनें -
अपनी बात आगे तक पहुंचाएं व् उन की बात सुनें व् जानें -
गाँधी जी के स्वराज की कल्पना को साकार करें |
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