" सरकारी पैसे पर जनता का नियंत्रण " ------- कीर्ति शर्मा पाठक.
आईये आज बात करते हैं हमारे अपने टैक्स मनी की |
हम सरकार को टैक्स देते हैं और इस उम्मीद मैं बैठे रहते हैं कि अब समाजोपयोगी कार्यों में इस का उपयोग होगा |
१) दिल्ली में कॉमनवेल्थ खेल के नाम पर ७० हज़ार करोड़ रूपये फूंके गए |अच्छे खासे फुटपाथ व् सड़कों को तोड़ कर दोबारा बनाया गया |
२) दिल्ली नगर निगम के पास सफाई कर्मियों व् ठेकेदारों को देने को पैसे नहीं हैं पर नगर निगम कि छत के ऊपर हेलीपैड बनाया जा रहा है ताकि नेताओं के हेलीकॉप्टर वहां उतर सकें |
३) बस्तियों के सौन्दर्यकरण पर पैसे खर्चे जाते हैं परन्तु स्कूल भवन न होने पर फंड डायवर्ट नहीं हो सकता,सीवर सिस्टम न होने पर फंड डायवर्ट नहीं हो सकता | चाहे बस्ती में लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था न हो परन्तु यदि सौन्दर्यकरण के अंतर्गत फव्वारे लगवाना कमेटी ने पास किया है तो फव्वारे ही लगेंगे चाहे पानी की कमी के चलते वे एक दिन भी न चलें |
जब हम अपनी समस्याएं ले कर जाते हैं तो अफसर फंड की कमी की दुहाई देते हैं |
ज़ाहिर है सरकार के पास पैसा तो है पर वह गलत कामों में उस का इस्तेमाल कर रही है, ऐसी चीज़ों पर इस्तेमाल किया जा रहा है जिस की हमें ज़रुरत ही नहीं |
हमें ज़रुरत है मोहल्ला सभाओं की,वार्ड सभाओं की,ताकि हम अपने जनप्रतिनिधियों और स्थानीय अफसरों के साथ मिल कर उस फंड का अपने ज़रुरत के मुताबिक इस्तेमाल करवा सकें |
हमें ज़रुरत है व्यवस्था परिवर्तन की जहाँ हम एक जागरूक नागरिक का फ़र्ज़ निभाते हुए सरकारी फंड का सही उपयोग करा सकें |
हमें ज़रुरत है अपने कर्तव्यों का पालन करने की जिस से हम अपने अधिकार पा सकें |
आइये हम सब जागरूक होने की दिशा में पहला कदम बढायें और स्थानीय चर्चा समूह के मेम्बर बनें -
अपनी बात आगे तक पहुंचाएं व् उन की बात सुनें व् जानें -
गाँधी जी के स्वराज की कल्पना को साकार करें |
हम सरकार को टैक्स देते हैं और इस उम्मीद मैं बैठे रहते हैं कि अब समाजोपयोगी कार्यों में इस का उपयोग होगा |
१) दिल्ली में कॉमनवेल्थ खेल के नाम पर ७० हज़ार करोड़ रूपये फूंके गए |अच्छे खासे फुटपाथ व् सड़कों को तोड़ कर दोबारा बनाया गया |
२) दिल्ली नगर निगम के पास सफाई कर्मियों व् ठेकेदारों को देने को पैसे नहीं हैं पर नगर निगम कि छत के ऊपर हेलीपैड बनाया जा रहा है ताकि नेताओं के हेलीकॉप्टर वहां उतर सकें |
३) बस्तियों के सौन्दर्यकरण पर पैसे खर्चे जाते हैं परन्तु स्कूल भवन न होने पर फंड डायवर्ट नहीं हो सकता,सीवर सिस्टम न होने पर फंड डायवर्ट नहीं हो सकता | चाहे बस्ती में लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था न हो परन्तु यदि सौन्दर्यकरण के अंतर्गत फव्वारे लगवाना कमेटी ने पास किया है तो फव्वारे ही लगेंगे चाहे पानी की कमी के चलते वे एक दिन भी न चलें |
जब हम अपनी समस्याएं ले कर जाते हैं तो अफसर फंड की कमी की दुहाई देते हैं |
ज़ाहिर है सरकार के पास पैसा तो है पर वह गलत कामों में उस का इस्तेमाल कर रही है, ऐसी चीज़ों पर इस्तेमाल किया जा रहा है जिस की हमें ज़रुरत ही नहीं |
हमें ज़रुरत है मोहल्ला सभाओं की,वार्ड सभाओं की,ताकि हम अपने जनप्रतिनिधियों और स्थानीय अफसरों के साथ मिल कर उस फंड का अपने ज़रुरत के मुताबिक इस्तेमाल करवा सकें |
हमें ज़रुरत है व्यवस्था परिवर्तन की जहाँ हम एक जागरूक नागरिक का फ़र्ज़ निभाते हुए सरकारी फंड का सही उपयोग करा सकें |
हमें ज़रुरत है अपने कर्तव्यों का पालन करने की जिस से हम अपने अधिकार पा सकें |
आइये हम सब जागरूक होने की दिशा में पहला कदम बढायें और स्थानीय चर्चा समूह के मेम्बर बनें -
अपनी बात आगे तक पहुंचाएं व् उन की बात सुनें व् जानें -
गाँधी जी के स्वराज की कल्पना को साकार करें |
प्रतिष्ठेत,