३०/०३/२०१२. भ्रष्टाचार - घोटालों के कारण
भ्रष्टाचार और घोटाले होने के कारणों में मुख्यत: व्यक्ति
का लोभ, सख्त कानून व्यवस्था का अभाव जिससे गुन्हा करनें वाले
को भय से मुक्ति तथा किसी अधिकार संपन्न व्यक्ति के द्वारा किसी भी कारण अपराधी को संरक्षण की स्थिति प्रमुख है। ऐसे समय कठोर और अत्यंत कड़वे निर्णय लेनें बजाय इन विषयों पर अपना मुंह मोड़ लेने पर कोई भी व्यक्ति हो उसके अधीनस्थ लोगों में जैसे मंत्रियों, अधिकारियों या कर्मचारियों में ना तो कोई अनुशासन रहपाएगा और नाही उसका कोई भय रहेगा। इतना ही नहीं ऐसे व्यक्ति के प्रति आत्मिक आदर की भावना भी शनै-शनै समाप्त हो जावेगी।
" इस स्थिति में जनता को प्रामाणिक और दक्ष प्रशासन मिलने की सोचना ठीक वैसा ही होगा जैसे किसी अति महत्व पूर्ण वस्तु की खोज बिना रोशनी के अँधेरे कोठरी में करना।"
क्या देश में आए दिन खुल रहे नए-नए करोड़ों रुपयों के घोटालों के पीछे समय पर कठोर और कड़वे निर्णय न लिए जाना यह भी एक कारण तो नहीं है ? क्या इस विषय में निष्पक्ष अध्ययन और उसके परिणामों के अनुसार अग्रिम कार्यवाही करना निश्चित ही देश हित में नही होगी ? क्या राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, देशके सभी मुख्यमंत्री और विभिन्न संस्थाओं के प्रमुखों द्वारा देश हित में उक्त अध्ययन करवानें की व्यवस्था और इमानदार चरित्र की प्रस्तुति होगी ? इस प्रक्रिया में सफल होनें पर निश्चित ही जनता में मलिन होती जा रही छबि निखर जायेगी और भ्रष्टाचारी को संरक्षण देनें के आरोप मिट जायेंगे, जिसकी मै सभी के लिए ह्रदय से कामना करता हूँ।
.....चन्द्रकांत वाजपेयी [जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता] औ.बाद.
ई-मेल:- chandrakantvjp@gmail.com
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